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Thursday, August 19, 2010

क्या कुरआन सचमुच ईश्वरीय ग्रन्थ है ?

बी. एन. शर्मा

क्या कुरआन सचमुच ईश्वरीय ग्रन्थ है ?
डाक्टर ज़कारिया नायक जैसे इस्लामी विद्वान् कुरआन को अल्लाह के द्वारा प्रणीत ग्रन्थ बताते हैं .और दावा करते हैं किकुरान में लिखा एक एक शब्द अल्लाह ने मुहम्मद पर नाजिल किया है.इसलिए इसमे किसी भी प्रकार की गलती नहीं है.जबकि अन्य धर्म ग्रंथोंमे गलतिओं की भरमार है.क्योंकि वे मनुष्यों द्वारा रचित हैं.अल्लाह की किताब होने के कारण कुरआन त्रुटी रहित और प्रमाणिक है
मैं आपको कुरआन से कुछ उदाहरण दे रहा हूं ,आप स्वयं निर्णय करिए कि ज़कारिया नायक के दावे में कितनी सच्चाई है.
१--जमीन की सृष्टी के बारे में

कुरआन में कहा गया है कि अल्लाह ने जमीन को दो दिनों में बनाया था
सूरा-हां मीम सजदा ४१ आयत ९
फिर दूसरी जगह कहा गया है कि जमीन को छे दिनों मेंबनाया था
सूरा यूनुस १० आयत ३ .इनमे कौन सी बात सच है ?
२ -- फिराउन के बारे में

कुरआन में कहा गया है कि मिस्र का राजा फिराउन अपने अपराधिओं को क्रूस पर लटका कर मौत की सजा देता था .
सूरा अल आराफ ७ आयात १२४
जबकि क्रूस पर लटकाने की प्रथा रोमन लोगों ने शुरू की थी.फिराउन का काल रोमनों से तीन हजार पहिलेका है.
३-- सामरी के बारे में
कुरआन में बताया गया है कि, एक सामरी जाती के व्यक्ति ने इस्रायली लोगों को बहकाया था ,और उन लोगों को सोने के बछड़े की पूजा करने के लिए प्रेरित किया था
सूरा -ताहां २० आयत ९५
जबकि उस समय सामरी लोगों का कोई अस्तित्व ही नहीं था.यह लोग काफी बरसों बाद यहूदिओं से अलग हुए थे.
४-- उजेर या एजरा के बारे में
कुरआन में उजैर के बारे में कहा गया है कि यहूदी उजैर को खुदा का बेटा मानते थे.और उसकी इबादत करते थे
सूरा तौबा -९ आयत ३०
लेकिन उजैर यहूदी धर्म में दीक्षित नहीं था.और न ही उजैर यहूदी धर्म का अनुयायी था.इसलिए उसे कहता का बेटा मानने का सवाल ही नहीं है ५ --सिकंदर के बारे में
५-- कुरआन में सिकंदर ,जिसे अरबी में जुलकरनैन भी कहा जाता,बताया गया है कि वह अल्लाह का बन्दा था .उसे अल्लाह ने सुख समृद्धी और लम्बी आयु का बरदान दिया था
सूरा कहफ़ -१८ आयत ८३.८४,९८
लेकिन सिकंदर ३५६ ई पू ३५६ में ३३ साल की आयु में भारत में बियास नदी के किनारे बीमारी से मारा गया था
६-- ईसाइयों के बारे में
कुरआन में कहा गया है कि,ईसाई तीन तीन खुदाओं को मानते हैं. खुदा ,मरियम और ईसा मसीह को.
सूरा मायदा -५ आयत ११६,और आयत ७३ से ७५
जबकि ईसाई मरियम को खुदा नहीं मानते .वे ट्रिनिटी में विश्वास रखते है इसके अनुसार ईसाई पिता परमेश्वर ,पुत्र ईसा और पवित्र आत्मा को मानते है .वे इन तीनों को ही एक ही ईश्वर की तीन विभूति मानते है .मरयम को वह संत मानते हैं .यही मुसलमान भी मानते हैं.
७-- मरियम के बारे में
कुरआन में लिखा है कि इसा की माँ मरयम हारून की बहिन थी हारून का बाप इमरान था उसके दो लड़कों का नाम मूसा और हारून था.
सूरा मरियम -१९ आयत २८ ,सूरा -आले इमरान ३ -आयत ३३,३६
लेकिन मरयम और हारून व् मूसा के काल में सैकड़ों साल का अंतर है.हारून और मूसा मरियम से काफी वर्षों पहिले पैदा हुए थे.

इस से सिद्ध होता है कि कुरआन में इतिहास से सम्बंधित कई गलतियाँ हैं अगर अल्लाह अन्तर्यामी और सर्व ज्ञाता होता तो वह ऎसी भूलें नहीं करता.
क्या जकरया नायक अब ही यह दावा करेंगे कि कुरआन में कोई गलती नहीं है ,और यह अल्लाह की किताब है
अपनी अगली पोस्ट में जकारिया नायक के दावोंका भण्डाफोड़ करूंगा .कृपया प्रतीक्षा करें


प्रस्तुति-राजीव कुमार

http://bhandafodu.blogspot.com/2010/05/blog-post_22.html

2 comments:

  1. यदि ईश्वर (अल्लाह) कोई ग्रन्थ लिखेगा तो क्या वह कुरान जैसा होगा? उसकी भाषा में, उसके विचारों में, उसकी शैली में अलौकिकता, प्रभुता झलेकेगी। उस ग्रन्थ में कही गयी बातें समय की कसौटी पर खरी उतरेंगी। वह लोगों को बांटेगा नहीं। ऐसी बातें कहेगा जो सनातन सत्य हों। वह बात-बात पर लोगों को डरायेगा नहीं! (जैसा कुरान में किया गया है)

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  2. kuran srif ek aadmi ki man ka vishya hai .....usne purano ki cpoy ki hai ye baat proof bhi hui hai

    mihaam ka jo charitra tha usne usko dhrm bana diya .wo maas khata tha wo maas khana sahi batay aur 2 saadi ki to do saadi kerna sahi bataya

    yesi aur bhi bate hai

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